R. N. Kao
R&AW

20 अक्टूबर 1962 चीन ने भारत पर अचानक हमला कर दिया बड़ी संख्या में चीनी सैनिक भारतीय सीमा में घुस आए। चीन और भारत के बीच भीषण युद्ध हुआ जिसमें भारत की करारी शिकस्त हुई। देश अभी ठीक से इसे बाहर ही नहीं आ पाया था। फिर साल 1965 में पाकिस्तान ने भी भारत पर अचानक हमला कर दिया। भारत-पाकिस्तान में बहुत बड़ा युद्ध हुआ। हालांकि इस युद्ध में भारत की जीत हुई। पर भारत को विदेशी आक्रमणों और बाहरी खतरों की जानकारी जुटाने के लिए एक बाह्य खुफिया एजेंसी की बहुत कमी महसूस हो रही थी। इसी कमी को पूरा करने के लिए भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साल 1968 में R.N. Kao के साथ मिलकर देश की पहली बाह्य खुफिया एजेंसी R&AW की स्थापना की। कौन थे राॉ के पहले प्रमुख आर. एन. काओ. जिनकी जिंदगी थी उनकी ही खुफिया एजेंसी राॉ से भी ज्यादा खुफिया। आइए जानते हैं…..

कौन थें R.N. Kao ?

R.N. Kao को भारतीय खुफिया एजेंसी R&AW के पहले प्रमुख व संस्थापक थे। वह हमारे देश की सभी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक क्षणों में मौजूद थे। उन्होंने अपनी करियर की शुरुआत सिविल सर्वेंट के रूप में की थी। R.N. Kao को अपने करियर की शुरुआत में एक पुलिस ऑफिसर थे, तब हमारा भारत अंग्रेजों के अधीन था।

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जन्म एवं शिक्षा

रामेश्वर नाथ का जन्म 10 में 1918 को संयुक्त प्रांत (united province) ब्रिटिश इंडिया वर्तमान के उत्तर प्रदेश के वाराणसी मैं हुआ था। उनका जन्म एक कश्मीरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। 5 साल के ही उम्र में उनके पिता का निधन हो जाने के कारण उनकी परवरिश उनके चाचा पंडित त्रिलोकी नाथ के यहां बड़ौदा में हुई। बड़ौदा से ही उन्होंने अपनी स्कूल की शिक्षा प्राप्त की। यहां उन्होंने सन 1932 में मैट्रिक और 1934 में पोस्ट मैट्रिक की परीक्षा पास करी। 1936 में उन्होंने बैचलर आफ आर्ट्स की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त करी। इसके बाद उन्होंने मास्टर्स डिग्री पूरी करने का फैसला लिया। पर परिवार में पैसों की कमी होने के कारण उनकी मां ने उन्हें नौकरी करने का सुझाव दिया। पर उन्होंने सोचा की नौकरी करने से उनकी जिंदगी में कुछ खास बदलाव नहीं आएगा इसलिए उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर यानी मास्टर्स की डिग्री प्राप्त करी।

करियर

स्नातक उत्तर की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ही कानून की पढ़ाई जारी रखी। लेकिन सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भारतीय पुलिस में भर्ती होने पर उन्होंने कानून की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। जिस दिन R.N. Kao भारतीय पुलिस में भर्ती होते हैं वह दिन उनके परिवार के लिए सबसे खुशी का दिन था उनकी मां जो बहुत ही कम उम्र में अपने पति को खो चुकी थी वह इस दिन बहुत ही खुश थी। रामेश्वर नाथ जब पुलिस में भर्ती होते हैं तो उन्हें लगता है कि उनका सपना पूरा हो गया। 1941 आते-आते उनका प्रशिक्षण संयुक्त प्रांत वर्तमान के उत्तर प्रदेश में होता है। पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 1947 में भारत भारत की आजादी के बाद उनका चयन इंटेलिजेंस ब्यूरो में हो जाता है। उनको खुद आईबी के निर्देशक बी एन मलिक ने चुना था। आईबी में उन्हें वीआईपी सुरक्षा का प्रभारी बनाया गया था। जिसमें हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की भी सुरक्षा शामिल थी। उनके कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब 11 अप्रैल 1955 को हांगकांग से जकार्ता की तरफ जा रहे एयर इंडिया के चार्टर हवाई जहाज कश्मीर प्रिंस में बम धमाका हुआ उस हवाई जहाज में कई बड़े पत्रकार और चीनी आफ्सर थे। जिनकी उसे धमाके में मौत हो गई। तब प्रधानमंत्री नेहरू और आईबी के डायरेक्टर बी.एन. मलिक ने इसकी जांच की जिम्मेदारी R.N. Kao को दिया था। इस काम को R.N. Kao बहुत ही बखूबी से पूरा किया।

व्यक्तित्व

व्यक्तित्व से रामेश्वर नाथ बहुत ही शर्मीले व निजी व्यक्ति थें। वह बहुत ही सामान्य एवं सादा जीवन जीते थें। R.N.Kao लाइमलाइट से बहुत दूर रहना पसंद करते थे। जैसे ही 1977 में इंदिरा गांधी की सरकार गिरी तो वह सार्वजनिक जिंदगी से दूर हो जाते हैं। और एक निजी जिंदगी जीने लगते हैं। वे टीवी और पत्रकारों को इंटरव्यू देने से भी मना कर देते हैं। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या होने के बाद वह फिर अपनी निजी जिंदगी जीने लगते हैं। तथा फिर कोई सार्वजनिक यह बड़ा पद नहीं लेते हैं। R. N. Kao ना कभी अपनी तारीफ करते थे ना ही दूसरों को करने देते थे। उदाहरण के लिए 1996 में बांग्लादेश की आजादी की 25वीं सालगिरह मनाई जा रही थी। तभी एक बांग्लादेशी उच्च अधिकारी R. N. Kao को बोलते हैं कि सर आपको तो वहां स्टेज पर होना चाहिए था। आपकी वजह से 1971 में बांग्लादेश की आजादी मुमकिन हो पाई उसे समय वह इस बात को हंस कर टाल देते हैं। दलाई लामा तक उनके बारे में तारीफ करते हैं ।
2002 में 83 साल की उम्र में उनका निधन हो गया वह हमारे देश के लिए महानायक थे।

रॉ (R&AW) की स्थापना

20 अक्टूबर 1965 जब चीन द्वारा भारत पर अचानक हमला कर दिया गया। इस युद्ध में भारत को बहुत बड़े हार का सामना करना पड़ा और चीन ने भारत के अक्साई चीन वाले क्षेत्र में कब्जा कर लिया। इस समय इंटेलिजेंस ब्यूरो जो देश की एकमात्र खुफिया एजेंसी थी वह पूरी तरह से नाकाम रही। आईबी की इस नाकामी को देखते हुए देश के बाहरी मामलों के लिए अमेरिका के साथ मिलकर आईबी के अंदर ही नए इंटेलिजेंस टीम बनाई जाती है। जून 1963 में एविएशन रिसर्च सेंटर बनाया जाता है और एक स्पेशल फ्रंटियर फोर्स का गठन होता है। भारत और अमेरिका के बीच खुफिया रक्षा सहयोग समझौता होता है। जिसके तहत अमेरिका 8 c461 और 4 छोटे हवाई जहाज भारत के एक खुफिया एयर बेस पर आते हैं। इस सब का मिशन कि चीनी कब्जे वाले तिब्बत और शिंज्यांग प्रांत से फोटोग्राफिक खुफिया जानकारी हासिल करना होता है। इस संस्था का हेड R.N. Kao को ही बनाया जाता है। कुछ सालों बाद भारत को एक और झटका लगता है । 1965 में पाकिस्तान भी भारत के ऊपर हमला कर देता है। उनके हजारों सिपाही कश्मीर में घुस जाते हैं। जबकि देश की इंटेलीजेंस संस्थाओं को इसकी खबर नहीं होती है यह भारतीय इंटेलिजेंस संस्थाओं की दूसरी सबसे बड़ी नाकामी होती है। इसके कारण भारतीय सेना को आगे आना पड़ता है और 1965 में भारत पाकिस्तान के बीच भयानक युद्ध होता है। इस युद्ध में भारत की जीत हो जाती है। पर यह भी पता चलता है कि भारतीय खुफिया तंत्र में बहुत बड़ी कमी है। कुछ सालों बाद देश की नई प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी बनती है। इंदिरा गांधी यह समझती और जानती है कि भारत के अस्तित्व के लिए हमें एक बेहतर खुफिया एजेंसी और इंटेलिजेंस सिस्टम की जरूरत है। फिर इंदिरा गांधी अपने मुख्य सचिव पी.एन. हसकर तथा रामेश्वर नाथ से मदद मांगती हैं । R.N.Kao सीआईए की तर्ज पर देश के पहले बाहरी खुफिया एजेंसी की रूपरेखा तैयार करते हैं। तथा वह इसका नाम R&AWरखते हैं। R&AWकी शुरुआत 250 एजेंट और जांच कर्ताओं के साथ हुई थी। जिसे R.N.Kao ने खुद एक-एक करके चुना और ट्रेनिंग दिया था। उन्होंने यह फैसला लिया कि R&AW सीधा प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करेगी। इस तरह R&AW की स्थापना हुई।

भारत-पाकिस्तान युद्ध तथा बांग्लादेश का जन्म

1947 में जब भारत आजाद हुआ तो धर्म के आधार पर भारत का बंटवारा हो गया। जिसमें भारत से अलग होकर पाकिस्तान बना जो दो टुकड़ों में था। एक पाकिस्तान तथा दूसरा पूर्वी पाकिस्तान जो पश्चिम बंगाल के बगल में था। पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली मुसलमान ज्यादा रहते हैं। पूर्वी पाकिस्तान में 1970 के चुनाव में शेख मुजीबुर रहमान और उनकी पार्टी अवामी लीग आसानी से भारी बहुमत के साथ जीत जाती है। पर पश्चिमी पाकिस्तान के आर्मी जनरलों ने उन्हें सरकार बनाने से मना कर दिया तथा उनकी बात अस्वीकार कर दी। इससे पूर्वी पाकिस्तान वर्तमान के बांग्लादेश में अशांति फैल गई और विद्रोह होने लगा। इस विद्रोह को दबाने के लिए पाकिस्तान ने मार्च 1971 में ऑपरेशन सर्च लाइट चलाया। इस ऑपरेशन में शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन को दबाना छात्रों शिक्षकों को और बुद्धिजीवियों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाना एवं उनकी हत्याएं शामिल थी। 20 में 1971 तक चली इस ऑपरेशन में भारी नरसंहार हुआ और लगभग 30 लाख लोग मारे गए। परिणाम स्वरुप बड़ी संख्या में बांग्लादेशी शरणार्थी भारत आने लगे। अंततः भारत को बांग्लादेशी विद्रोह का समर्थन करना पड़ा। रॉ के कई एजेंट बांग्लादेश में घुसकर उस समय के विद्रोही गुटों जैसे मुक्ति वाहिनि को ट्रेनिंग एवं हथियार देतें है । 1 लाख से भी अधिक की संख्या में बंगाली वालंटियर भारतीय सेना से गोरिल्ला युद्ध कला सिखते हैं और वहां कई गोरिल्ला कैंप बनाए जाते हैं। भारत बांग्लादेश को बचाने के लिए अपनी सेना भेजता है। भारत और पाकिस्तान के बीच भीषण युद्ध होता है। R&AW की इंटेलीजेंस इतनी सटीक थी कि भारत तीन हफ्ते में ही यह युद्ध जीत जाता है। और पाकिस्तान के दो टुकड़े हो जाते हैं। परिणाम स्वरुप बांग्लादेश का जन्म होता है। इस जीत का श्रेय भारत के आर्मी चीफ के साथ-साथ रो प्रमुख R. N. Kao को भी जाता है।

सिक्किम का विलय

सिक्किम के विलय में भी R. N. Kao का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान था। सिक्किम भारत पूर्वोत्तर सीमा से लगा एक छोटा सा राज्य था। जहां पर राजशाही थी। सिक्किम की रक्षा भारत ही करता था। उस समय सिक्किम के राजा चोग्याल थे। सिक्किम में प्रजातंत्र की मांग बढ़ रही थी। वहां के लोग भारत के साथ सम्मिलित होना चाहते थे। पर चोग्याल विद्रोह को कुचलना चाहता था। रामेश्वर नाथ ने उस समय भारत सरकार को सिक्किम की राजनीतिक स्थिति पर खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई। अप्रैल 1975 को भारतीय सेवा ने सिक्किम के प्रमुख स्थलों एवं सरकारी स्थलों की सुरक्षा अपने हाथ में ले ली। भारी जनमत ने राजतंत्र समाप्त करके भारत में सम्मिलित होने का निर्णय किया। फलस्वरुप 16 मई 1975 को सिक्किम आधिकारिक रूप से भारत का 22वाँ राज्य बन गया।

निष्कर्ष

रामेश्वर नाथ काॉव हमारे भारत के एक महानायक थें। जो देश के सभी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक क्षणों जैसे 1965 भारत-चीन युद्ध, 1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध, 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध और बांग्लादेश का जन्म, 1975 सिक्किम का विलय के समय मौजूद थें। जिन्होंने न केवल हमारे देश को बाहरी दुश्मनों से बचाया और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग R&AW जैसी बेहतर खुफिया एजेंसी हमारे देश को दी ।

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