
भारत में E20 पेट्रोल लागू कर दिया गया है जिसमें 20% एथेनॉल की मिलावट होती है। पर इस पेट्रोल से लोगों की गाड़ियों में बहुत सी समस्याएं आ रही हैं। कुछ गाड़ियों के तो इंजन भी खराब हो जा रहे और कुछ सड़कों पर अपने आप बंद हो रहे। इसके अलावा इस E20 से माइलेज कम होने की भी शिकायत आ रही है। हाल ही के में एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा था। जिसमें रिपोर्टर और यूट्यूबर मनीष कश्यप Toyota showroom में अपनी खराब गाड़ी लेकर पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया था कि उनकी Toyota Innova Hycross में E20 पेट्रोल भरवाने के बाद खराबी आ गई। इस मामले पर बहुत से लोग भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के ऊपर भी E20 पेट्रोल जबरदस्ती लागू करने और भ्रष्टाचार के आरोप में इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
E20 पेट्रोल
E20 पेट्रोल 80% पेट्रोल तथा 20% एथेनॉल का मिश्रण है। E20 E का मतलब एथेनॉल और 20 का मतलब 20% होता है। एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है जिसे गन्ने मक्का या अन्य कृषि उत्पादों को सड़ा कर बनाया जाता है।
E20 पेट्रोल कैसे बनाया जाता है? फ्यूल-ग्रेड (बिना पानी वाले) एथेनॉल को फैक्ट्री में तैयार किया जाता है। जिससे वह पेट्रोल में आसानी से ब्लेंड हो जाए। फिर बने हुए शुद्ध एथेनॉल को रिफाइनरी या तेल डिपो में भेजा जाता है। E20 पेट्रोल बनाने के लिए 20% एथेनॉल को 80% पेट्रोल में विशेष बेडिंग मशीनों में अच्छी तरह मिलाया जाता है। उदाहरण के लिए मान लीजिए हमें 100 लीटर E20 पेट्रोल चाहिए तो 20 लीटर एथेनॉल को 80 लीटर पेट्रोल में मिलाया जाता है लीजिए हो गया है 100 लीटर E20 पेट्रोल तैयार।
एथेनॉल (Athanol) कैसे बनता है:
Ethnol making : एथेनॉल (Ethanol) एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे मुख्य रूप से शर्करा (Sugar), स्टार्च (Starch) या सेलुलोज़ (Cellulose) वाले पौधों से बनाया जाता है। भारत में सबसे अधिक एथेनॉल गन्ना, मक्का और चावल जैसे कृषि उत्पादों से बनाया जाता है।
एथेनॉल बनाने के लिए गन्ना या मक्का से शर्करा या स्टार्च निकाल कर उसमें यीस्ट मिलाकर फर्मेंट किया जाता है। फिर वाष्पीकरण जैसी प्रक्रियाओं (Distillation) द्वारा एथेनॉल को प्राप्त शुद्ध किया जाता है।
भारत में E20 पेट्रोल क्यों लागू किया गया:
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल बाहर से खरीदता है। अंतरास्ट्रीय अस्थिरता जैसे मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो रही है और लगातार इसकी कीमतें बढ़ रही हैं । साथ ही साथ रुपए के कमजोर होने के कारण हमारा आयात का खर्च और बढ़ रहा है तथा विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से कम हो रहा है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलने से विदेशों से कम तेल खरीदना पड़ता है, जिससे देश के अरबों डॉलर बच जाते हैं ।
दूसरा सबसे बड़ा कारण प्रदूषण नियंत्रण भी है क्योंकि एथेनॉल के जलने से हवा में हानिकारक हानिकारक गैसों व PM 2.5 जैसे चीजों का प्रदूषण कम फैलता हैं।
तिसारा कारण सरकार की तरफ से किसानों की आय में बढ़ोतरी का दिया जा रहा है । एथेनॉल गन्ने और मक्का जैसे कृषि उत्पादों से बनता है । कृषि उत्पादों का उपयोग बढ़ने से किसानों को अतिरिक्त कमाई का मौका मिलता है।
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E20 ke उद्देश्य और सरकार की योजना:
एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम 2001 में शुरू हुआ था।
2013-14 में ब्लेंडिंग लगभग 1.5% थी।
सरकार ने 20% ब्लेंडिंग का लक्ष्य 2030 से पहले ही 2025-26 में हासिल कर लिया है ।
E20 पेट्रोल के चार प्रमुख उद्देश्य है जिसमें सबसे प्रमुख कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है।
E20 से कच्चे तेल की खपत कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। सरकार के अनुसार एथेनॉल ब्लेंडिंग से लाखों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचेगी। इसके अलावा दूसरा ऊर्जा सुरक्षा भी एक जरूरी उद्देश्य है क्योंकि, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हो जाता है या आपूर्ति प्रभावित होती है , तो भारत पर उसका असर पड़ता है एथेनॉल ब्लेंडिंग से ये असर कम पड़ेगा। तीसरा उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना है। एथेनॉल गन्ना, मक्का और अन्य फसलों से बनता है जिससे इनकी मांग बढ़ती है।
इससे किसानों को अतिरिक्त बाजार और बेहतर आय मिलने की उम्मीद है।
चौथा और सबसे आखिरी उद्देश्य पर्यावरण सही रखना और प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम करना है। क्योंकि एथेनॉल जलने पर पेट्रोल के मुकाबले कम प्रदूषण करता है।
अभी सरकार ने 20% से आगे (जैसे E30 या E85) आम वाहनों के लिए बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया है। भविष्य में ऐसा करने से पहले वैज्ञानिक परीक्षण और सभी हितधारकों से परामर्श किया जाएगा।
क्या E20 पेट्रोल से खराब हो रही है गाड़ियां?
E20 पेट्रोल से ज्यादातर खराबी पुरानी गाड़ियों में आ रही है। अगर आपकी गाड़ी पुरानी है और E20-compatible नहीं है तो लंबे समय तक E20 इस्तेमाल करने से फ्यूल पाइप, रबर सील जैसे हिस्सों पर असर पड़ सकता है। और
फ्यूल टैंक में जंग लगने जैसी समस्याएं आ सकती है। इसके साथ साथ कुछ मामलों में स्टार्टिंग या इंजन परफॉर्मेंस की समस्या आ सकती है। हालांकि यह हर गाड़ी में नहीं होती। लोग यह भी बोल रहें हैं कि, इंजन परफॉर्मेंस पहले जैसा महसूस नहीं होता है। इसके अलावा माइलेज में लगभग 5% तक कमी महसूस हो सकती है क्योंकि एथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी पेट्रोल से कम होती है। अगर नई गाड़ियों की बात करें तो उनमें भी लोगों के द्वारा कुछ शिकायतें आई हैं। पर इसमें कंपनियां खराब फ्यूल को जिम्मेदार बता रही हैं यूट्यूबर मनीष कश्यप के टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस में भी टोयोटा वालों ने यही बोला। अगर आपकी गाड़ी नई और E20-compatible है तो सामान्य तौर पर कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। निर्माता ने इंजन, फ्यूल पाइप और अन्य पार्ट्स को E20 के हिसाब से डिज़ाइन किया होता है। गाड़ी का खराब होना इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी गाड़ी E20 के लिए बनी है या नहीं।
रबर फ्यूल पाइप इंजन पार्ट्स और फ्यूल टैंक पर एथेनॉल का असर
अगर एथेनॉल लंबे समय तक संपर्क में रहा तो इसका रबर फ्यूल लाइनों और इंजन के कुछ पार्ट्स पर असर पड़ सकता है। जैसे रबर पाइप एथेनॉल से फूल सकते हैं, सख्त हो सकते हैं या उनमें दरारें पड़ सकती हैं। यदि गाड़ी E20 पेट्रोल के लिए डिज़ाइन नहीं की गई है, तो समय से पहले फ्यूल होज़ बदलने की जरूरत पड़ सकती है। क्योंकि एथेनॉल रबर के साथ रिएक्ट करता है और रसायनों को बाहर निकाल देता है, जिससे पाइप जल्दी खराब हो सकता है।
अगर बात करें इंजन पार्ट्स की तो फ्यूल पंप, इंजेक्टर और O-rings में घिसाव या लीकेज हो सकता है अगर वें एथेनॉल-रेज़िस्टेंट सामग्री के नहीं बने होंगे । पुराने इंजनों में जंग और सील खराब होने की संभावना अधिक रहती है। साथ ही साथ इससे फ्यूल टैंक में जंग लगने की भी संभावना हो सकती है । वैसे E20 के लिए बने इंजनों में सामान्यतः कोई समस्या नहीं होती है।
क्या पुरानी गाड़ियों E20 में चल सकती है आप अपनी गाड़ी में E20 पेट्रोल भरवा सकतें हैं या नहीं ?
अगर बात करे पुरानी गाड़ियों की तो कुछ पुरानी गाड़ियों में E20 भरवाने पर माइलेज में 3-5% तक कमी आ सकती है , हर गाड़ी में यह बराबर नहीं होगी। 2016 से पहले की BS-3 गाड़ियों में कुछ रबर पार्ट्स वगैरह बदलवाने की ज़रूरत पड़ सकती है।ज़्यादातर पुरानी गाड़ियाँ E20 पेट्रोल पर चल सकती हैं इसमें अचानक समस्या नहीं आएगी पर बहुत लंबे समय तक चलने के बाद पार्ट्स चेंज जैसी समस्याएं आ सकती है। ज्यादा पुरानी गाड़ियों जिनको 10 से 15 साल से अधिक हो गया है। वें E20 के लिए बनी ही नहीं हैं इनमें रबर पार्ट्स फ्यूल पाइप और फ्यूल पंप जल्दी खराब हो सकतें हैं। लंबे समय तक E20 पेट्रोल में चलने से जंग और लिकेज भी हो सकता है। आप अपनी गाड़ी में E20 पेट्रोल भरवा सकतें हैं या नहीं ये आपकी गाड़ी के मॉडल और निर्माण वर्ष पर निर्भर करता है। अगर आपकी गाड़ी E20 के लिए बनी है तो आप बेझिझक डलवा सकतें हैं पर अगर आपकी गाड़ी 10 साल से भी ज्यादा पुरानी है तो यह एक चिंता का विषय है। पुरानी गाड़ियों में एथेनॉल-रेज़िस्टेंट फ्यूल होज़ और सील लगाने से कुछ जोखिम कम हो सकता है। बाकी पेट्रोल का दाम भी एक समस्या है जहां E20 पेट्रोल प्रति लीटर 100 रुपए के आस पास हैं वहीं नॉर्मल पेट्रोल जिसमें 100% पेट्रोल है 160 रुपए प्रति लीटर से भी ज्यादा महंगी हो गई है। तो लोग महंगे दाम वाले पेट्रोल को मुश्किल से भरवाना पसंद करेंगे।
क्या E20 से होगा भारत के क्रूड ऑयल का आयात कम:
सरकार के मुताबिक इथेनॉल ब्लेंडिंग से पिछले दशक में विदेशी मुद्रा के रूप में करीब 1.55 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम की है। जब पेट्रोल का एक हिस्सा घरेलू एथेनॉल से बदला जाता है, तो उतनी मात्रा में पेट्रोल की आवश्यकता कम होती है। इससे क्रूड ऑयल के आयात पर कुछ सकारात्मक असर पड़ता है।सैद्धांतिक रूप से E20 से भारत का क्रूड ऑयल आयात कुछ हद तक कम हो सकता है, लेकिन यह पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। कच्चे तेल का आयात कुछ हद तक कम होगा, लेकिन इसे लेकर दावों और हकीकत में फर्क है।
E20 के फायदे
सरकार के मुताबिक इथेनॉल ब्लेंडिंग से पिछले दशक में विदेशी मुद्रा के रूप में करीब 1.55 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम की है। जब पेट्रोल का एक हिस्सा घरेलू एथेनॉल से बदला जाता है, तो उतनी मात्रा में पेट्रोल की आवश्यकता कम होती है। इससे क्रूड ऑयल के आयात पर कुछ सकारात्मक असर पड़ता है।सैद्धांतिक रूप से E20 से भारत का क्रूड ऑयल आयात कुछ हद तक कम हो सकता है, लेकिन यह पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। कच्चे तेल का आयात कुछ हद तक कम होगा, लेकिन इसे लेकर दावों और हकीकत में फर्क है।