
आने वाले समय में बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल डीजल मिलने में दिक्कत हो सकती है। भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा और बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों की समस्या को दूर करने के लिए एक नए नियम का प्रस्ताव रखा है। जिससे भविष्य में बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों के मालिकों को पेट्रोल डीजल मिलना मुश्किल हो सकता है।
क्या है बिना इंश्योरेंस पेट्रोल नहीं मिलने का नियम?
भारतीय सड़कों पर बहुत बड़ी संख्या में गाड़ियां बिना वाहन बीमा के चलती है। ये आंकड़ा लगभग 56% का है। बिना बीमा के चलने के कारण दुर्घटना होने के बाद की स्थिति में हादसे के शिकार लोगों को कोई मुआवजा नहीं मिल पाता। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) को एक नए नियम लागू करने का प्रस्ताव दिया है।इसके तहत गाड़ियों के फ्यूल को उनके वैलिड इंश्योरेंस से जोड़ दिया जाएगा। अगर इंश्योरेंस वैलिड नहीं हुआ, तो उस गाड़ी को पेट्रोल पंपों पर तेल नहीं मिलेगा।
यह भी पढ़ें :
पहले जंतर मंतर में NEET प्रोटेस्ट अब E20 पर बवाल, क्या गिर जाएगी BJP सरकार या है इसके आखिरी 5 साल?
लगातार गिर रहा रुपया फिर से आएगी भारत में महंगाई
भारत के जीडीपी रैंकिंग में गिरावट देश फिसला 4थे से 6ठे नंबर पर
भारत में पेट्रोल से खराब हो रहीं गाड़ियां आ रही परेशानियां
सुप्रीम कोर्ट का प्रस्ताव क्या है?
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक पायलट प्रोजेक्ट बनाने के लिए निर्देश दिया जिसके अनुसार बिना वैलिड इंश्योरेंस के गाड़ियों को पेट्रोल पंपों पर तब तक पेट्रोल न दिया जाए जब तक कि वाहन मालिक अपनी गाड़ियों का वैलिड इंश्योरेंस नहीं कराते या दिखाते। जरासल भारतीय सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने भारतीय सड़कों पर बड़ी संख्या में बिना बीमा वाले वाहनों के मामले पर ध्यान देते हुए वित्त संबंधी स्थायी समिति की 2024-25 की रिपोर्ट का उल्लेख किया और कहा कि तकरीबन 56% वाहन बिना बीमा के हैं। कोर्ट ने कहा कि बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों को फ्यूल देने से मना करने से बिना बीमा या बिना रजिस्टर्ड गाड़ियों को पहचानने में मदद मिलेगी और इससे मालिकों को भी सही इंश्योरेंस लेने के लिए बढ़ावा मिल सकता है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि वाहन अधिनियम की धारा 146 के नियमों का जमीनी स्तर पर पालन पक्का किया जाएगा। इसके लिए ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
पेट्रोल पंप पर बीमा की जांच कैसे हो सकती है?
पेट्रोल पंप पर बीमा की जांच के लिए अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नही किया गया है। पर अगर यह नियम लागू हो गया तो शायद पेट्रोल पंप के कर्मचारी या फ्यूल डालते समय आपका बीमा चेक कर सकते हैं। अगर आपके पास वैलिड इंश्योरेंस नहीं है तो हो सकता है की वें फ्यूल डालने से मना कर दे।
बिना इंश्योरेंस पेट्रोल नहीं मिलने का नियम क्यों लाया जा रहा है और यह किन वाहनों पर लगेगा?
बिना इंश्योरेंस पेट्रोल नहीं मिलने का नियम लाने के पीछे बहुत से महत्वपूर्ण कारण हैं। हमारे देश में लगभग 50% से अधिक गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रही है । एक्सीडेंट होने के बाद बिना थर्ड पार्टी इंस्योरेंस के होने के कारण गाड़ियां जब्त हो जाती हैं और घायल या मृत लोगों को मुआवजा भी नही मील पता है । इससे विक्टिम परिवार की स्थिति और बिगड़ जाती है। इसलिए सर्वोच्च्य न्यायालय के जजों ने इस प्रस्ताव का सुझाव दिया है। सड़क सुरक्षा और थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत जरूरी है । अगर बात करें की किस वाहन किसन पर लागू होगा No Insurance No Fuel का नियम तो, यह सभी गाड़ियों जैसे कार बाइक स्कूटर और बाकी अन्य आवागमन और ट्रांसपोर्ट वाहनों के लिए लागू होगा।
बिना इंश्योरेंस सड़क पर गाड़ी चलाने पर कितना जुर्माना लग सकता है?
भारत में बिना वैलिड थर्ड पार्टी इंस्योरेंस के गाड़ी चलाना कानूनी अपराध है । मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 196 हिसाब से पहली बार: ₹2,000 तक जुर्माना या 3 महीने तक की जेल, या दोनों हो सकती है। और दूसरी या बाद की बार: ₹4,000 तक जुर्माना या 3 महीने तक की जेल, या दोनों हो सकती है। साथ ही दुर्घटना या एक्सीडेंट जैसे स्थितियों में आपकी गाड़ी जब्त हो जाएगी इसके साथ आप पर सख्त कानूनी कार्यवाही भी हो सकती है ।
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस क्या है और यह हर वाहन के लिए क्यों जरूरी है?
थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस सड़क दुर्घटना में आपके वाहन से किसी दूसरे व्यक्ति या उसकी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई करता है। इसके अलावा भारत में सड़कों पर गाड़ी चलाने के लिए कम से कम थर्ड पार्टी इंस्योरेंस कानूनी रूप से जरूरी है। बिना इंश्योरेंस के गाड़ी चलाना कानूनन जुर्म है। इसके अलावा अगर आपकी गाड़ी से दुर्घटना की स्थिति में किसी दूसरे व्यक्ति या उसकी संपत्ति की नुकसान चोट या व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो इसका मुआवजा थर्ड पार्टी इंस्योरेंस वाली कंपनी देती है। गंभीर दुर्घटना में मुआवजे की रकम काफी बड़ी हो सकती है इसलिए बड़े आर्थिक नुकसान से बचने के लिए थर्ड पार्टी इंस्योरेंस बहुत जरूरी है